चित्तौड़ के शासक विक्रमादित्य, राणा सांगा, बहादुरशाह (chittaud ke shaasak vikramaadity, rana sanga, bahaadur shaah)

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चित्तौड़ के शासक विक्रमादित्य (chittaud ke shaasak vikramaadity)

राणा सांगा  (rana sanga)
राणा सांगा

उस समय चित्तौड़ के किले में लगभग आठ हजार राजपूत योद्धा राणा सांगा के साथ मुगल सेना का मुकाबला करने के लिए तैयार थे । एक खड़ी पहाड़ी पर बने चित्तौड़ के विशाल दुर्ग की घेराबन्दी करने में अकबर को लगभग एक माह का समय लगा । मोर्चे वालों की आड़ के लिए पेचदार छत्ता ‘ व ‘ साबात ‘ भी बनाये गये । पहाड़ी की तरफ से दो सुरंगें लगभग किले की तलहटी तक पहुँच गयीं जिनमें भारी मात्रा में बारूद भरकर विस्फोट किया गया ।

1.कुम्भलगढ़ दुर्ग, अरावली पर्वत श्रृंखला (kumbhalagadh durg, araavalee parvat shrankhala)


2.राजस्थान के जल दुर्ग, गागरोण दुर्ग, गिरि दुर्ग (rajasthan ke jal durg, gaagaron durg, giree durg)

राणा सांगा (rana sanga)

राणा सांगा अनके राजपूत राज के इतिहास प्रसिद्ध खानवा युद्ध में सांगा ( संग्रामसिह ) मेवाड़ की पराक्रमी शासक के राजपूत राजा और सामन्त उसके नेतृत्व में 1527 ई . प्रसिद्ध खानवा युद्ध में बाबर के विरुद्ध लडे । फिर विक्रमादित्य मेवाड़ की गद्दी पर बैठे । 1534 ई . में एक विशाल सेना के साथ चित्तौड़ पर आया तथा किले को घेर लिया । उसने अपने सेनापति रूमी खाँ तनसिंह और फिर विक्रमादित्य मेवाड़ की गद्दी बहादुरशाह 1534 ई . में अभियान का नेतृत्व सौपा तथा किले के फतह होने पर उसे चित्तौड़ का हाकिम बनाने का आश्वसान दिया ।

राजमाता हाड़ी कर्मवती और दुर्ग की अन्य सैकड़ों क्षत्रिय वीरांगनाओं ने जौहर की ज्वाला प्रज्वलित कर

अपने प्राणों की आहति दे दी ।

1.जालौर का दुर्ग, आबू का अचलगढ़ दुर्ग (jaalor ka durg, aabu ka achalagadh durg)

बहादुर शाह (bahaadur shaah)

बहादुरशाह का चित्तौड़ के किले पर अधिकार हो गया ।

यह युद्ध इतिहास में चित्तौड़ के दूसरे साके के नाम से प्रसिद्ध है ।

चित्तौड़ का तीसरा साका 1567 ई . में हुआ

जब मुगल बादशाह अकबर ने एक विशाल सेना के साथ चित्तौड़ पर चढ़ाई की ।

इस समय चित्तौड़ पर राणा उदयसिंह का शासन था । मालवा और गुजरात के मार्ग पर अवस्थित होने के कारण चित्तौड़ का सामरिक दृष्टि से विशिष्ट महत्त्व था । इधर राणा उदयसिंह जयमल राठौड़ , पत्ता सिसोदिया तथा अन्य प्रमुख सामन्तों पर किले की सुरक्षा का भार छोड़कर अपनी रानियों और परिवार के अन्य सदस्यों सहित निकटवर्ती पहाड़ों में सुरक्षित स्थान पर चला गया ।

1.जयगढ़ दुर्ग, निराला दुर्ग (jayagadh durg, niraala durg)


1.राजस्थान के प्रमुख दुर्ग, चित्तौड़ दुर्ग, बप्पा रावल (rajasthan ke parmukh durg, chittod durg, bappa raval)


3.वन का दुर्ग, वन दुर्ग की विशेषताएं, अचलदास खींची री वचनिका (van ka durg, van durg ki visheshatay, achal daas kheenchee ri vachanika)


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